नींबू ( LEMON )

 
 नींबू एक रसीला फल है। इसमें सिट्रिक अम्ल अधिक होता है। यह क्षारीय दृष्टि से एक अपरिहार्य फल है। नींबू का अचार भी डाला जाता है। नींबू के रस के बिना गाजर, मूली, खीरा, ककड़ी, प्याज आदि के सलाद को स्वाद (टेस्ट) नहीं होता हैं। नमक आदि से निर्मित चटनी में नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से भूख लगती है और पाचन क्रिया तीव्र होती हैं। नींबू मीठे, कुछ कड़वाहट लिए हुए तथा कागजी नींबू खट्टे होते हैं। गर्मी के मौसम में नींबू के रस का शर्बत बनाकर पिया जाता है।

 

विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिन्दी      .    नींबू
संस्कृत    .    निम्बू, निम्बुक, निम्बूक
बंगाली                कागजी लेंबु, पतिलेंबु
मराठी                कागजी लिब, लिबूं
अरबी      .    लिमुने हाजिम, लेमू हाजिम
पंजाबी                नींबू
तमिल                एलुमिच्चै
गुजराती   .    लिंबू, कागजी लीम्बु
फारसी                लिंमुने तुर्ष
अंग्रेजी                लेमन


रंग : कच्चा नींबू हरा और पक जाने पर पीला हो जाता है।

स्वाद : यह खाने में खट्टा और हल्का होता है।

स्वरूप : नींबू के छोटे झाड़ीनुमा कंटीले पेड़ होते हैं। नींबू की पत्तियां छोटी होती हैं। पत्तियों को मसलने पर खुशबू आती है। इसके फूल भी सुगंधित होते हैं। नींबू का फल गोल, चिकने, कच्चेपन में हरे और पकने में पीले रंग के हो जाते हैं।

नींबू में पाए जाने वाले तत्व : नींबू के फल में सिट्रिक एसिड, फास्फोरिक एसिड, मेलिक एसिड और शर्करा आदि तत्व पाये जाते हैं। नींबू के फल में तेल तथा तिक्त स्फटिकीय ग्लूकोसाइड हेस्पेरिडिन (विशेष रूप से छिलके के सफेद भाग) में पाया जाता है।

तत्व मात्रा तत्व मात्रा
प्रोटीन 1 प्रतिशत विटामिन-सी 39 मिलीग्राम/100 ग्राम
वसा 0.9 प्रतिशत लौह 2.3 मिलीग्राम/100 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट 11.1 प्रतिशत फास्फोरस 0.03 प्रतिशत
पानी 8.5 प्रतिशत कैल्शियम 0.07 प्रतिशत
रेशा 1.8 प्रतिशत अन्य विटामिन व खनिज अल्प मात्रा में


हानिकारक : पेट में घाव, पैरों के जोड़ों में दर्द, गले की टॉन्सिल, चक्कर आना तथा निम्न रक्तचाप वाले रोगियों को नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए। कमजोर यकृत (लीवर) वाले रोगी यदि नींबू का सेवन करते हैं तो उनके हाथ पैरों में तनाव पैदा होता है और निर्बलता (कमजोरी) बढ़ती जाती है। यदि नींबू का सेवन जारी रहता है तो बुखार आता है। खांसी होने पर खट्टी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसे करने से खांसी बढ़ती जाती है।

गुण : नींबू त्रिदोष नाशक (वात, पित्त और कफ को नष्ट करने वाला), दीपक-पाचक (भोजन को पचाने वाला), क्षय (टी.बी.), हैजा (विसूचिका), गृहबाधा निवारक, रुचिकारक (भूख को बढ़ाने वाला) और दर्द में लाभ देता है। नींबू के रस को पीने से रक्तपित्त (खूनी पित्त), स्कर्वी रोग में लाभ होता हैं। नींबू के फल की छाल को खाने से वायु (गैस) शान्त होती है। नींबू का रस हृदय के लिए लाभकारी, ज्वर (बुखार) को कम करने वाला और मूत्रजनन (पेशाब को लाने वाला) होता है। नींबू के रस को चीनी के साथ सेवन करने से अफारा (गैस का बनना), बदबू, डकारें, उदर शूल (पेट में दर्द) और उल्टी आदि विकार दूर हो जाते हैं। नींबू पित्त, मलस्तम्भक (मल को रोकना), कब्ज, गांठे, जोड़ों का दर्द (आमवात), कंठशूल (गले का दर्द) और जहर में लाभकारी है। नींबू का रस आमाशय, आंतों और खून की अम्लता (एसिडिटीज) की अधिकता को कम कर देता है जिससे स्नायु का दर्द और अधिक कमजोरी दूर होती है।


विभिन्न रोगों में सहायक :

1. मानसिक उन्माद (पागलपन):
  • नींबू के रस को मस्तक (माथे) पर लेप करने से लाभ मिलता है।
  • नींबू के बीजों को खाने से शान्ति मिल जाती है।
  • नींबू के बीजों को धूप में सुखाकर रोगी के तकिये के नीचे रखने से रोगी का दिमाग शान्त रहता है और पागलपन दूर हो जाता है।
  • नींबू के रस को पागलपन से पीड़ित व्यक्ति के माथे या सिर पर मालिश करने से पागलपन खत्म हो जाता है।
  • नींबू के छिलकों का चूर्ण बनाकर रोजाना 5 ग्राम की मात्रा में 200 मिलीलीटर पानी में डालकर लें।

2. नाक से खून आने पर (नकसीर):
  • नींबू की शिकंजी पीने से नाक से खून का बहना रुक जाता है।
  • नाक से खून आने पर नथुनों में 2-2 बूंद नींबू का रस टपकाने से नाक से खून का गिरना बन्द हो जाता है।
  • कागजी नींबू के रस की 1-2 बूंदे नाक में डालने से नकसीर (नाक से खून बहना) बन्द हो जाती है।

3. सांस का फूलना : नींबू के रस को शहद में मिलाकर चाटने से बच्चों का सांस फूलना बन्द हो जाता है।

4. मधुमेह (डाइबिटीज) की प्यास में: नींबू के रस को निचोड़कर पीने से लाभ होता है।

5. क्रोध आने पर : क्रोध के कारण बढ़ी हुई दिल की धड़कन को सामान्य करने के लिए 13 मिलीलीटर नींबू का रस पिलाना चाहिए।

6. माथे में पीड़ा होने पर : नींबू की 2 फांकों को गर्म करके कनपटियों पर 1 घंटे तक सेंक करने से माथे की पीड़ा मिट जाती है।

7. तैलीय बालों के लिए : 1 गिलास पानी में 1 नींबू को निचोड़कर इस पानी से सिर को धोयें और बालों को रगड़ने से बाल सूखे व साफ हो जाते हैं।

8. बालों का उड़ जाना : रोजाना 1 से 2 महीने लगातार नींबू का रस रगड़ने से बाल वापस उग आते हैं।

9. बालों को काला करने के लिए : नींबू के रस में पिसा हुआ सूखा आंवला मिलाकर सफेद बालों पर लेप करने से बाल काले होते हैं।

10. बालों के लिए :
  • नींबू के रस में आंवला के फलों को पीसकर बालों में लगाने से रूसी नष्ट होती है और बालों का झड़ना बन्द हो जाता है।
  • नहाने से पहले सिर में नींबू के रस से अच्छी तरह मालिश करने से बालों का पकना व गिरना दूर हो जाता है, इसके प्रयोग से जुएं भी समाप्त हो जाती हैं।
  • 10 मिलीलीटर नींबू के रस में नारियल का पानी 10 मिलीलीटर की मात्रा में मिलाकर बालों में अच्छी तरह 40-45 मिनट तक लगाने के बाद बालों को पानी से धो लें। कुछ महीनों तक ऐसा करने से बालों का टूटना रूकता है और बाल लंबे और घने होते हैं।
  • रात को सोते समय नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर सिर मे मलने से लाभ होता है।

11. फरास (डैण्डरफ) : नींबू के रस को पानी में मिलाकर सिर को धोने से बाल मुलायम होते हैं। नींबू को काटकर सिर में रगड़ने और रस को सूखने के बाद धोने से फरास दूर होती है।

12. सुख से प्रजनन (आसानी से बच्चे का जन्म) : चौथे महीने से प्रसवकाल (डिलिवरी टाइम्स) तक गर्भवत्ती स्त्री को 1 नींबू की शिंकजी (पानी में चीनी और नींबू को निचोड़कर) रोजाना पीने से आसानी से बच्चे का जन्म होता है।

13. हिस्टीरिया : गर्म पानी में नींबू, जीरा, भुनी हुई हींग, नमक और पोदीना मिलाकर कम से कम 1 महीने तक पिलाने से हिस्टीरिया से राहत मिलती है।

14. मोतियाबिन्द : अदरक का रस, नींबू का रस, सफेद प्याज का रस  10-10 मिलीलीटर तथा छोटी मक्खी का शहद 90 ग्राम मिलाकर छान लें, फिर 1-1 बूंद सुबह-शाम को 2 बार लंबे समय तक आंखों में डालते रहने से मोतियाबिन्द दूर होता है।

15. आंखों के लिए :
  • नींबू के रस को लोहे की खरल में कूटकर लोहे के दस्ते से घोंटते-घोंटते जब रस काला पड़ जाये, तो इस रस को आंखों के आसपास पतला-पतला लेप करने से आंखों की पीड़ा मिट जाती है।
  • नींबू के रस में अफीम को मिलाकर लौहे के तवे पर पीसकर लेप करना चाहिए।
  • कटे हुए नींबू के आधे भाग को लौहे के जंग पर रगड़कर पीले कपड़े में पोटली बनाकर आंखों पर घुमाने से खुजली तथा लाली नष्ट हो जाती है।
  • पानी, लौंग और कालीमिर्च को नींबू में हरे कांच की चूड़ी को बारीक पीसकर अंजन (काजल) करने से फूली और जाला मिट जाता है।

16. कील-मुंहासे होने पर :
  • नींबू के रस को चेहरे पर मलने से कील-मुंहासे ठीक हो जाते हैं।
  • नींबू, तुलसी और काली कसौंदी के रस को बराबर लेकर एक साथ मिलाकर धूप में रख लें, जब वह गाढ़ा हो जाये तो इसे चेहरे पर लगाने से लाभ मिलता है।
  • नींबू के रस को 4 गुना ग्लिसरीन में मिलाकर चेहरे पर रगड़ने से कील-मुंहासे नष्ट हो जाते हैं और चेहरा सुंदर बन जाता है। इसका प्रयोग सारे शरीर पर करने से त्वचा कोमल और चिकनी हो जाती है।
  • नींबू के रस में चीनी और सुहागा मिलाकर मुंह पर मलने से मुंह की झांई और दाग मिटते हैं।
  • 1 चम्मच गर्म दूध की मलाई पर नींबू को निचोड़कर चेहरे पर मलने से चेहरे के मुंहासे दूर हो जाते हैं।

17. चेहरे की सुंदरता के लिए :
  • नींबू के रस में शहद मिलाकर लगाने से चेहरे की झुर्रिया कम होती हैं।
  • 1 चम्मच नींबू के रस में 1 चम्मच दूध मिला लें। रोज रात को सोने से पहले इसे चेहरे और गर्दन पर लगा लें। 15 मिनट के बाद मौसम के अनुसार ठंड़े या गर्म पानी से धो लें। इस तरह चेहरे की सफाई के साथ-साथ यह त्वचा को नर्म और मुलायम भी रखता है। 2 चम्मच नींबू का रस, थोड़ी सी दूध की मलाई और थोड़ा सा बेसन या मैदा को मिलाकर उबटन बना लें और चेहरे पर मलें। इससे चेहरे की खुश्की दूर होती है और चेहरे में चमक आती है।
  • 2 चम्मच आटा, 4 चम्मच दूध, 1 चुटकी हल्दी और एक नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह से गूंथ लें और नहाने से पहले शरीर पर मलें, इसके लगाने के 10 मिनट बाद नहा लें और नहाने में साबुन का प्रयोग न करें। इससे शरीर की कोमलता बढ़ती है और शरीर सुंदर होता है।
  • अण्डे की सफेदी में नींबू का रस मिलाकर मुंह पर चुपड़ने से व फिर गुनगुने पानी से धोने से चेहरे पर रौनक आ जाती है।
  • नींबू के रस और समुद्र के झाग को मिलाकर चेहरे पर मलने से दाग-धब्बे हट जाते हैं। समुद्र का झाग न मिले तो केवल नींबू का रस दूध की मलाई में मिलाकर लगाने से लाभ मिलता है।
18. मुंह के छाले :
  • नींबू के छिलकों को रगड़ने व नींबू के 20-30 मिलीलीटर रस को नियमित रूप से पीने से तुरन्त आराम मिलता है।
  • नींबू के रस में रसौत पीसकर छाले पड़ पर मलने से आराम मिलेगा।
  • नींबू को गर्म पानी में निचोड़कर कुल्ली करें तथा नींबू अधिक मात्रा में खायें।

19. पसली में दर्द : नींबू का रस 10 मिलीलीटर, जवाखार 3 ग्राम और शहद 6 ग्राम मिलाकर पीने से पसली का दर्द, हृदय (दिल) और पेट का दर्द दूर होता है।

20. कान का बहना :
  • सुबह उठने के बाद पानी में नींबू को निचोड़कर पीने से कान से मवाद बहना कम हो जाता है।
  • बिजौरा नींबू के रस में थोड़ी-सी सज्जीखार मिलाकर कान में बूंदों के रूप में डालने से कान में से बहने वाला पीव बन्द होता है।
  • नींबू के 200 मिलीलीटर रस में सरसों का या तिल का तेल मिलाकर अच्छी तरह उबाल लें। पकने पर छानकर बोतल में भरकर रख लें। उसमें से 2-2 बूंद कान में डालते रहने से कान में पीव, खुजली, दर्द और बहरेपन में लाभ पहुंचाता है।

21. प्यास अधिक लगना :
  • नींबू की पत्ती को मिट्टी में मिलाकर गोली बना लें। इस गोली को आग में पकाकर 1 गिलास पानी में डालकर बुझाएं। फिर उस पानी को कपड़े से छानकर पिलायें। इससे बुखार व अन्य रोगों में लगने वाली प्यास मिटती है और गले का सूखना बन्द हो जाता है।
  • नीबू को 1 गिलास पानी में निचोड़कर पीने से तेज प्यास का लगना बन्द हो जाता है।
  • नींबू का शर्बत पीने से प्यास शान्त होती है।
  • गर्मी में नींबू के रस को शीतल (ठंड़े) पानी में मिला लें, फिर उसमें चीनी डालकर शिकंजी बना लें। इसे पीने से गर्मी नष्ट होती है और प्यास शान्त होती है।

22. कब्ज :
  • 1 नींबू का रस 1 गिलास गर्म पानी के साथ रात में सोते समय लेने से पेट साफ हो जाता है। नींबू का रस 15 मिलीलीटर और शक्कर (चीनी) 15 ग्राम लेकर 1 गिलास पानी में मिलाकर रात को पीने से पुरानी कब्ज दूर हो जाती है।
  • नींबू के रस में सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से पेट की बीमारी और गैस बाहर निकल जाती है।
  • 1 गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस व एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से कब्ज दूर होती है और शरीर का वजन घटने लगता है।
  • नींबू का रस, 200 मिलीलीटर हल्का गर्म पानी, 5 मिलीलीटर अदरक का रस और 10 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है।
  • 5 मिलीलीटर नींबू के रस को 200 मिलीलीटर पानी के मिलाकर उसमें 10 ग्राम मिश्री घोलकर पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) में लाभ मिलता है।
  • गन्ने का रस गर्म करके नींबू के रस के साथ सुबह के समय लेने से लाभ होता है।
  • नींबू का रस 2 चम्मच, चीनी 5 ग्राम को मिलाकर शर्बत बना लें। 4-5 दिन तक लगातार पीने से लाभ होता है।
  • नींबू के रस में थोड़ी-सी पिसी हुई कालीमिर्च को डालकर सेवन करना चाहिए।

23. गर्भवती स्त्रियों की उल्टी : नींबू के रस को पानी में मिलाकर सुबह पिलाने से वमन (उल्टी) में आराम आता है और भोजन आसानी से पचता है।

24. पेट दर्द :
  • नींबू के टुकड़ों पर कालानमक, कालाजीरा और कालीमिर्च का पिसा हुआ चूर्ण डालकर चाटने से लाभ होता है।
  • 1 छोटा चम्मच कागजी नींबू के रस में 1 चुटकी कालानमक पिसा हुआ नमक और 1 कप गुनगुने पानी को अच्छी तरह मिलाकर रोगी को देने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
  • नींबू को काटकर इसके टुकड़ों पर अजवायन और कालानमक डालकर धीमी आग पर गर्म करके चूसें। इससे पेट दर्द में काफी लाभ होता है।
  • 1 चम्मच नींबू और अदरक का रस मिलाकर चाटने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
  • आधे नींबू के रस में थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर 100 मिलीलीटर पानी में डालकर पीने से पेट के दर्द में आराम होता है।
  • नींबू के रस में शहद और थोड़ा-सा जवाखार मिलाकर चाटने से लाभ होता है।
  • 12 मिलीलीटर  नींबू का रस, 6 ग्राम शहद और 6 मिलीलीटर अदरक के रस को 1 कप पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द में लाभ मिलता है।
  • नींबू का रस 3 मिलीलीटर, चूने का पानी 10 मिलीलीटर, शहद 10 ग्राम तीनों को मिलाकर 20-20 बूंद लें। इससे पेट दर्द और अजीर्ण (मन्दाग्नि) दोनों बीमारियों में लाभ मिलता है।
  • कच्चे नींबू का छिलका दिन में 2 से 3 बार खाने से पेट में होने वाले बादी का दर्द मिटता जाता है।
  • नींबू की फांकों में कालानमक, कालीमिर्च और जीरा भरकर गर्म करके चूसने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है और पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।
25. डकार और जुलाब आने पर: बिजौरे की जड़, अनार की जड़ और केशर पानी में घोटकर पिलाने से डकार और जुलाब की बीमारी में आराम होता है।

26. पथरी :
  • बिजौरे नींबू के रस में सेंधानमक मिलाकर पिलाने से पथरी दूर होती है।
  • नींबू के रस में सेंधानमक मिलाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से पथरी गल जाती है।

27. शक्ति वर्धक :
  • 1 गिलास गर्म पानी में 1 नींबू को निचोड़कर पीते रहने से शरीर के अंग-अंग में नई शक्ति महसूस होती है। इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। मानसिक कमजोरी, सिर में दर्द और पुट्ठों में झटके लगना बन्द हो जाते हैं। अधिक मेहनत के कारण आई कमजोरी में बिना नमक या चीनी मिलाकर छोटे-छोटे घूंटों में पीने से कमजोरी नहीं रहती है। ध्यान रहे कि पथरी के रोगी को नींबू नहीं देना चाहिए।
  • 40 ग्राम किशमिश, 6 मुनक्का, 6 बादाम और 6 पिस्ते रात को आधे किलो पानी में कांच के बर्तन में भिगो दें। सुबह उठकर पीसकर, छान लें और 1 चम्मच शहद और 1 नींबू निचोड़कर भूखे पेट पीयें। इससे मानसिक व शारीरिक कमजोरी तथा थकान दूर होती है।

28. खून की कमी या न बनना (रक्तक्षीणता) :
  • नींबू और टमाटर का रस सेवन करने खून की कमी दूर होती है। यदि पाचन अंग कार्य नहीं करते, भोजन नहीं पचता, पेट में गैस बनती हो तो एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस मिलाकर बार-बार पीते रहने से पाचन अंगों की धुलाई हो जाती है तथा खून और शरीर के समस्त विषैले पदार्थ पेशाब के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
  • 2 चम्मच नीबू के रस में आधा कप टमाटर का रस मिलाकर प्रतिदिन सुबह और शाम 20 दिन तक पीने से रोग में लाभ मिलता है।

29. खून के बहने पर (रक्तस्राव) :
  • 1 कप गर्म दूध में आधा नींबू को निचोड़कर दूध फटने से तुरन्त पहले पीने से खून का बहना बन्द हो जाता है। ध्यान रहे कि इस प्रयोग को 1 या 2 बार से अधिक न करें।
  • फेफड़े, आमाशय, गुर्दे, गर्भाशय और मूत्राशय से खून के आने पर नींबू का रस ठंड़े पानी में मिलाकर दिन में 3 बार पीने से खून का बहना बन्द हो जाता है।

30. खून की शुद्धि के लिए : नींबू को गर्म पानी में मिलाकर रोजाना दिन में 3 बार पीना चाहिए। पानी को चाय की तरह गर्म करके खून की सफाई होती है।

31. खूनी-पित्त के लिए : नींबू के 20 मिलीलीटर रस में चीनी मिलाकर रोजाना सेवन करने से खूनी-पित्त दूर होती है।

32. वमन (उल्टी) :
  • 250 मिलीलीटर शर्बत में नींबू निचोड़कर 2-3 बार पीने से उल्टी होना रुक जाती है।
  • ठंडे पानी में नींबू और शक्कर मिलाकर शर्बत बना लें। इस शर्बत को पीने से जी मिचलाना और उल्टी आना बन्द हो जाती है।
  • नींबू में शक्कर और कालीमिर्च भरकर चूसने से उल्टी आना बन्द हो जाती है।
  • गर्भावस्था में ज्यादा उल्टी होने पर सुबह नींबू के रस को पानी में मिलाकर स्वाद के लिए उसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पीने से उल्टी आना दूर हो जाती है।
  • पोदीना और नींबू दोनों को एक साथ खाने से उल्टी आना बन्द हो जाती है।
  • अगर बच्चा दूध पीने के बाद उल्टी कर देता हो तो नींबू के रस की थोड़ी बूंदे पानी में मिलाकर बच्चे को पिलाने से लाभ होता है।
  • 4 नींबू का रस, 50 ग्राम सेंधानमक और 125 ग्राम जीरा को पानी में डालकर भिगो दें। भीगते-भीगते जब नींबू का रस सूख जाये तो सूखा जीरा बाकी रह जाये तो उसे निकालकर शीशी में भर लें। इसको रोजाना सुबह, दोपहर और शाम को आधा-आधा चम्मच लेने से गर्भावस्था के समय की उल्टियां होना रुक जायेगी।
  • नींबू में इलायची भरकर चूसने से भी उल्टी में आराम होता है। उल्टी होने पर नींबू को गर्म करके सेवन नहीं करना चाहिए।
  • बच्चे को उल्टियां होने पर पानी में नींबू को निचोड़कर या पानी में थोड़ा सा नमक और शक्कर डालकर थोड़ी-थोड़ी देर में बच्चे को पिलाने से आराम आता है। ध्यान रहे कि बच्चे को 5 से 6 घंटे तक खाने को कुछ भी न दें।
  • अगर जी मिचलाने लगे तो तुरन्त ही नींबू चूस लेना चाहिए। इससे उल्टी नहीं होगी।
  • नींबू के रस में शक्कर, पिप्पली का चूर्ण और खील को मिलाकर खाने से उल्टी आने का रोग दूर हो जाता है।
  • नींबू के सूखे छिलकों को जलाकर या पीसकर रख लें। इसे लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लेकर शहद में मिलाकर चाटने से उल्टी आना बन्द हो जाती है।
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About Aryan Malhotra

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