
नींबू कई प्रकार के होते हैं- नारंगी, चकोरे, संतरे, मौसमी, बिजौरा व जंगली नींबू आदि। ये सभी नींबू की ही किस्में हैं। नींबू के पेड़ 3 से 4 मीटर ऊंचे होते हैं। नींबू के पेड़ बीज और कलम दोनों से लगाई जाती है। कलम लगाने के लिए नींबू की टहनी पर मिट्टी को बांध दिया जाता है और जब मिट्टी वाले भाग पर जड़ें निकल आती हैं तो उस टहनी को काटकर कलम (पौधा) तैयार किया जाता है।
नींबू के पेड़ बगीचे में लगाई जाती है और यह जंगलों में भी उत्पन्न होते हैं। सभी प्रकार के नींबू के पत्ते अंडाकार होते हैं और जातियों के अनुसार छोटे-बड़े होते हैं। नींबू के फूल सफेद और खुशबूदार होते हैं। नींबू कच्चा रहने पर हरे रंग का होता है और पक जाने पर पीले रंग का हो जाता है। पेड़ लगाने के 3 से 4 वर्ष बाद ही इसमें फल लगने लगते हैं। नींबू का उपयोग बहुत से कामों में किया जाता है। नीबू के रस में बहुत-सी रासायनिक औषधियां होती हैं। नींबू पाचन शक्ति को मजबूत करता है और भूख को बढ़ाता है। इसका प्रयोग भोजन के साथ करने से भोजन आसानी से हजम हो जाता है और इसी लिए खाने खाते समय नींबू के अचार या नींबू का रस मिला हुआ सलाद का प्रयोग करते हैं। भोजन के साथ नींबू खाने से स्वाद भी बढ़ता है।
विभिन्न भाषाओं में नाम :
| हिन्दी | कागजी नींबू। |
| अंग्रेजी | लेमन्। |
| संस्कृत | निम्बूक। |
| बंगाली | पातिलबु |
| गुजराती | लींबू |
| मराठी | निंबोणी। |
| कन्नड़ी | निंबे, लिबुहण्णु। |
| तामिल | एलुमिच्चे। |
| तैलिंगी | निमपण्डु। |
| मलयलम | चेरन नाटकं। |
| फारसी | लिमुनेतुश। |
| अरबी | लिमुनेहा भीज। |
| लैटिन | लेमन, एसीडम्। |
विभिन्न रोगों में उपयोग:
1. अजीर्ण (पुरानी कब्ज): खाना खाने से पहले नींबू, अदरक और सेंधानमक को मिलाकर सेवन करने कब्ज दूर होती है और पाचनशक्ति बढ़ती है। इस तरह रोजाना सेवन करने से वायु, कफ, दस्त का न आना एवं आमवात (गठिया) रोग भी ठीक होता है।
2. हैजा:
हैजा की बीमारी फैलने के समय 2 नींबू का रस निकालकर रोजाना भोजन अथवा नमक
के साथ सेवन करना चाहिए। इससे हैजा से बचाव होता है। इसका प्रयोग हैजा होने
पर भी करना लाभकारी होता है।
3. पाचनशक्ति कमजोर होना :
नींबू व नमक को किसी मिट्टी के बर्तन में अच्छी तरह से मिलाकर रख दें और
फिर बर्तन का मुख ढककर अच्छी तरह धूप में सूखाएं। नमक अच्छी तरह नींबू में
मिल जाने के बाद उसमें से रोज 1-2 टुकड़े खाएं। इससे पाचनशक्ति की कमजोरी दूर होती है और कब्ज खत्म होती है। इसे भोजन के समय खाने से स्वाद भी बढ़ता है।
4. आंखों का दर्द:
- लोहे के तवे पर अफीम और दन्ती को नींबू के रस के साथ खरल करके लेप बना लें और इस लेप को आंखों के ऊपर लेप करें। इससे आंखों का दर्द ठीक होता है।
- लौह कीट और दन्ती को पीसकर नींबू पर भुरभुराकर हल्दी से रंग पीले कपड़े में बांधकर आंखों के ऊपर लगाएं। इससे आंखों का दर्द व अन्य रोग ठीक होता है।
5. उल्टी : नींबू को बीच से चीरकर उसमें मिश्री डालकर चूसने से उल्टी आनी बंद होती है।
6. पेट का दर्द: एक नींबू का रस निकाल लें और उसमें थोड़ी सी चीनी डालकर पीएं। इससे पेट का दर्द समाप्त होता है।
7. पित्तशमन: नींबू का रस और नमक मिलाकर सेवन करने से पित्त नष्ट होता है।
8. पेट के कीडे़: नींबू का रस निकालकर दिन में 2 बार पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।
9. प्यास का अधिक लगना: एक नींबू का रस निकालकर उसमें दो चुटकी चीनी डालकर पीने से प्यास का अधिक लगना कम होता है।
10. जोड़ों के दर्द व खांसी : 5 ग्राम नीबू के रस में 3 ग्राम चीनी डालकर पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है और खांसी दूर होती है।
11. पित्त गिरना: नींबू का शर्बत बनाकर पीने से शरीर में पित्त की मात्रा सामान्य बनता है।
12. हिचकी:
सूखे नींबू को जलाकर उसके राख को बारीक करके शहद में मिलाकर चाटने से
हिचकी का बार-बार आना ठीक होता है। उल्टी आने पर भी इसका प्रयोग किया जा
सकता है।
13. दस्त साफ न आना व भूख न लगना: 6 ग्राम नींबू का रस, 50 ग्राम पानी और 10 ग्राम चीनी मिलाकर शर्बत बनाकर प्रतिदिन रात को सोने से पहले पीना चाहिए। इसका सेवन 5 से 7 दिन तक करने से दस्त साफ आने लगता है और भूख भी बढ़ती है।
14. खुजली: 10 ग्राम नारियल का तेल व 6 ग्राम नींबू का रस मिलाकर शरीर पर मलना चाहिए और फिर गर्म पानी से नहाने चाहिए। इससे त्वचा की खुजली दूर होती है।
15. पेशाब का बंद होना: नींबू के बीजों को थोड़ा कूटकर नाभि में भरकर ऊपर से मट्ठे या पानी की धार नाभि पर छोड़ने से पेशाब आता है। इसका प्रयोग 10 वर्ष से नीचे के आयु वाले बच्चों का पेशाब बंद हो जाने पर किया जाता है।
16. जिगर का रोग : 1
पका कागजी नींबू लेकर उसके दो टुकड़े कर लें और इसका बीज निकालकर आधे नींबू
को चार भाग में बांट लें। इस बात का ध्यान रखें कि इसके टुकड़े अलग-अलग न
हों। इसके बाद 1 भाग में कालीमिर्च का चूर्ण, दूसरे भाग में काला सेंधानमक, तीसरे में सोंठ का चूर्ण और चौथे में मिश्री का चूर्ण भर दें। इसे रात को प्लेट में रखकर ढक दें। सुबह खाना-खाने से 1 घंटा पहले इस नींबू की टुकड़े को हल्की आंग पर गर्म करके चूसें। इसे आवश्कतानुसार 7-21
दिन तक लेने से लीवर (जिगर) सही होता है और यकृत विकार ठीक हो जाता है।
इसके प्रयोग से मुंह का स्वाद भी अच्छा रहता है। इससे भूख बढ़ती है। यह सिर
दर्द और पुरानी कब्ज दूर होती है। इस का प्रयोग यकृत (जिगर) की सभी
बीमारियां जैसे- पुराना मलेरिया, बुखार, कुनैन- पारा का जहर, अधिक शराब पीना, मिठाई खाना, अमीबिक पेचिश जीवाणुओं का यकृत (जिगर) में प्रवेश कर जाना आदि में लाभ होता है।
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