परिचय-

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पद्मासन, सिद्धासन या वज्रासन में बैठकर अपने होठों को ऐसे आकार में कर लें कि जैसे आप सीटी बजा रहें हो। इस हालत में पहले मुंह से गहरी सांस लें और फिर उसे नाक से छोड़ दें। ऐसा करते समय आपकी नज़र और ध्यान नाक के आगे वाले भाग पर रहना चाहिए।
लाभकारी-
इससे शरीर की कुछ खास तरह की ग्रंथियों से रस का बहाव होता है तथा पुराने
रोग और बुढ़ापे को दूर करने में मदद मिलती है तथा यह मुद्रा भोजन पचाने की
क्रिया को भी ठीक करती है।
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