‘V’ से संबंधित आयुर्वेदिक औषधियां

‘V’ Se sambandhit Ayurvedic Aushdhiya: Jk health world ke is page men V Aur Bh shabd se sambandhit Ayurvedic Aushdhiyan di gaee hai jaise: Vach, vangobhi, varmool, aroon, vidarikand, etc.

‘V’ से संबंधित आयुर्वेदिक औषधियां :

वच (बच)  :  बच मूल रूप से यूरोप और मध्य एशिया का पौधा है। यह पौधा भारत में कब से उगाया जाता है। इसके बारे में किसी भी प्रकार का कोई भी प्रमाण नहीं मिलता है....................

वन सांगली  :    वन सांगली के फलों का रस हृदयशक्तिवर्द्धक, हृदय और उसके कार्य सम्बन्धी रोगों जैसे- सांस-कृच्छता, हृदयावरोध आदि में बहुत उपयोगी है....................

वनगोभी असली  :  बनगोभी असली रक्त-स्तम्भक है। इसके 10 ग्राम पत्तों को 10 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर 50 मिलीलीटर पानी में छानकर एक सप्ताह तक पिलाने से....................

वनगोभी  :  बनगोभी के पत्तों को कूटकर उसका रस निकाल कर दिन में 3 से 4 बार बवासीर के मस्सों पर लगाने से लगाने से 7 दिनों में ही मस्से ठीक हो जाते हैं....................

वनिप्सका  :  वनसिप्सा के काढ़े को गांव के लोग जुकाम में उपयोग में लाते हैं। सूखी खांसी में गुल बनफ्सा का प्रयोग ग्रामवासी अदरक के साथ चाय बनाकर करते हैं....................

वरमूल  :  वरमूला की जड़ को गांवों के लोग त्रिकुटा (सोंठ, मिर्च, पीपल) और तक्र (मट्ठे) के साथ सूप बनाकर बुखारों में देते है। यदि जानवरों को लू लग जाये या गर्मी के ....................

वरुण  :  वरुण पित्त को नष्ट करने वाला, मल को भेदने वाला, कफ, पेशाब की जलन, गैस, गैस का गोला, वातरक्त, कीड़ों को नष्ट करने वाला, गर्म, पाचनशक्तिवर्द्धक, कषैला....................

वैसलीन  :  सफेद वैसलीन और मोम को एक छोटे पतीले में डाल दें। इसके बाद आग पर एक बड़े पतीले में आधा पतीला पानी भरकर गर्म होने के लिए रख दें....................

वत्सनाभ  :  भारत में सिक्किम से लेकर उत्तर पश्चिम हिमालय तक समुद्र तल से 10,000 से 15,000 फुट की ऊंचाई तक वत्सनाभ के पौधे पाये जाते हैं। हमारे देश में....................

विदारीकंद   :  विदारीकंद की चक्राकार लताएं नदी, नालों के किनारे और हिमालय प्रदेश की निचली पहाड़ियों में अधिक पायी जाती हैं। विदारीकंद की जड़ में....................

विधारा   :  विधाराबीज 2 से 4 ग्राम चूर्ण (विधारा बीजों को प्रयोग से पहले अपामार्ग का रस या लवणजल में भिगोकर धूप में सूखा लें), 7 से 14 मिलीलीटर गाय के पेशाब के....................

विष (मीठा)   :  विष (मीठा) की जड़ को भारत के गांवों के लोग विषनाशक मानते हैं। गठियावात, वायु के दर्द में मीठा की जड़ को गर्म घी में पकाते हैं और फिर जोड़ों पर....................

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