कोशिका विभाजन
(Cell division)
कोशिकाएं अलग-अलग
बंटकर अपने ही जैसी कोशिकाएं बनाने की क्षमता रखती है। एक जैसे गुणों वाली
एक ही आकार की तथा एक ही कार्य करने वाली कोशिकाएं मिलकर किसी ऊतक जैसे
पेशी, हड्डी आदि का निर्माण करती है। शारीरिक विकास की प्रक्रिया मे कोशिका
के आकार में वृद्धि एक सीमा तक ही होती है। पूरी तरह विकसित होने के बाद
कोशिका दो भागों में बंट जाती है। कोशिका विभाजन की आवश्यकता, नष्ट हुई
कोशिकाओं के स्थान पर नई कोशिकाएं स्थापित करने के लिए भी होती है। एक
कोशिका का दो सन्तति कोशिकाओं (daughter cells) में बंट जाना जीवन के हर
समय चलते रहने का आधार है।
कोशिका विभाजन दो प्रकार से होता है- (numbering problems)
1 - सूत्री विभाजन
(Mitosis)
मनुष्य में होने वाला कोशिका
का विभाजन सबसे ज्यादा जटिल प्रक्रिया माना जाता है। इसमें प्रत्येक
कोशिका से दो सन्तति कोशिकाओं (daughter cells) की उत्पत्ति होती है,
जिनमें से हर एक उसी समय विभाजित हुई कोशिका के जैसी होती है। इस प्रकार का
विभाजन कायिक कोशिकाओं (Somatic cells) में होता है। इससे शरीर की वृद्धि
होती है तथा कायिक कोशिकाएं दुबारा स्थापित होती है।
सूत्री विभाजन में चार अवस्थाएं होती है-
1. पूर्वावस्था (Prophase)
2. मध्यावस्था (Metaphase)
3. पश्चावस्था (Anaphase)
4. अन्त्यावस्था (Telophase)
1. पूर्वावस्था (Prophase)-
इस अवस्था में समांग (homogeneous) न्यूक्लियस में न्यूक्लियोप्लाज्म
गाढ़ा होकर सूक्ष्म कणों (Granules) का रूप ले लेता है। ये कण धीरे-धीरे
बढ़कर बड़े हो जाते हैं और आपस में जुड़कर एक पतला कुण्डलित क्रोमेटिन
सूत्र बना लेते हैं। इसी समय न्यूक्लियर मेम्ब्रेन गायब हो जाती है तथा
सेन्ट्रोसोम दो भागों में विभाजित हो जाता है और उसके सेन्ट्रियोल एक दूसरे
से दूर हटकर कोशिका के ध्रुवों तक पहुंच जाते हैं। पूर्वावस्था या प्रोफेज
की समाप्ति तक इनसे क्रोमेटिन रहित पदार्थ के सूत्र बन जाते हैं, जो
तर्कुरूप (Spindle shaped) होते हैं। न्यूक्लियो प्लाज्म़ के गाढ़ा होते
जाने से क्रोमेटिन सूत्र और अधिक मोटा एवं छोटा हो जाता है। चूंकि
न्यूक्लियर मेम्ब्रेन लुप्त हो जाती है, इसलिए यह सीधा साइटोप्लाज्म में
पड़ा रहता है। बाद में क्रोमेटिन सूत्र लम्बाई में विभाजित हो जाता है।
इसके परिणामस्वरूप दो सन्तति सूत्र बन जाते हैं जो एक दूसरे के पास स्थित
रहते हैं। इसके बाद विखण्डित क्रोमेटिन सूत्र अलग-अलग भागों में टूट जाता
है, जिन्हें क्रोमोसोम या गुणसूत्र कहा जाता है। मानव कोशिका में ये
क्रोमोसोम 23 जोड़ों के रूप में होते है। वैसे दूसरे जीवों में इनकी संख्या
अलग-अलग होती है।
2. मध्यावस्था (Metaphase) (numbering problems)-
इस अवस्था मे क्रोमोसोम कोशिका के बीच वाले भाग के आस-पास व्यवस्थित हो
जाते हैं। ये सेन्ट्रोसोम से धागे जैसी रचना से जुड़े हुए दिखाई देते हैं।
सेन्ट्रोसोम अब कोशिका के विपरीत धुव्रों पर रहते हैं। हर मातृ क्रोमोसोम
(mother chromosome) विभाजित होकर दो सन्तति क्रोमोसोम्स (daughter
chromosomes) में बंट जाने पर यह अवस्था समाप्त हो जाती है।
3. पश्चावस्था (Anaphase) (numbering problems)-
इस अवस्था में ये दो सन्तति क्रोमोसोम्स (daughter chromosomes) दूर-दूर
होकर कोशिका के दोनों ध्रुवों पर चले जाते हैं और सेन्ट्रोसोम के आस-पास
व्यवस्थित हो जाते हैं। इसके बाद सेन्ट्रोसोम से जुड़ी हुई धागे जैसी
रचनाएं (Spindle fibers) विभाजित हो जाती हैं।
4. अन्त्यावस्था (Telephase) (numbering problems)-
इस अवस्था में कोशिका का मुख्य भाग (Cell-body) बीच से में संकरा होता
जाता है, धागे जैसी रचनाएं समाप्त हो जाती है, दो न्यूक्लियर मेम्ब्रेन्स
दुबारा बन जाती है, कोशिका विभाजित हो जाती है और न्यूक्लियस में
क्रोमोसोम्स समाप्त होकर क्रोमेटिन तन्त्र बनाते हैं। इसके बाद दोनों
सन्तति कोशिकाएं आकार में बढ़ती है तथा स्वयं सूत्री विभाजन द्वारा विभाजित
होती है।
2 - अर्द्धसूत्री विभाजन
(Meiosis)
अर्द्धसूत्री विभाजन प्रजनन कोशिकाओं (शुक्राणु एवं डिम्ब) में होता है जबकि सूत्री विभाजन (Mitosis) कायिक कोशिकाओं में होता है। सूत्री विभाजन में सिर्फ एक विभाजन होता है, जबकि अर्द्धसूत्री विभाजन में दो विभाजन होते है। सूत्री विभाजन में सन्तति कोशिकाओं (daughter cellas) में क्रोमोसोम्स की संख्या वही होती है जो मातृ कोशिका (mother cell) में होती है, लेकिन अर्द्धसूत्री विभाजन के फलस्वरूप क्रोमोसोम्स की संख्या आधी रह जाती है।
अर्द्धसूत्री विभाजन में प्रजनन
कोशिकाओं (gonadal cells) में दो क्रमबद्ध विभाजनों के बाद चार सन्तति
कोशिकाएं (daughter cells) बनती है। इस विभाजन के दौरान क्रोमोसोम्स के
जोड़े अलग-अलग हो जाते हैं तथा हर जोड़े में से एक मातृ कोशिका के विपरीत
ध्रुव की ओर चला जाता है। जब यह विभाजित होता है तो हर एक सन्तति कोशिका
में क्रोमोसोम्स अगुणित संख्या (haploid number) में होते हैं अर्थात इनमें
23 क्रोमोसोम्स का एक जोड़ा होता है। गैमीट्स (शुक्राणु एवं डिम्ब) के
संयुक्त होने के फलस्वरूप जो कोशिका बनती है, उसे युग्मनज (zygote) कहते
हैं तथा इसमें पूरे 46 क्रोमोसोम्स होते हैं (23 क्रोमोसोम शुक्राणु के और
23 क्रोमोसोम डिम्ब के)। इस युग्मनज का कोशिका विभाजन माइटोसिस द्वारा होता है जिसके परिणामस्वरूप एक भ्रूण (embryo) बनता है।
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