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छोटे, बड़े या मध्यम आकार के लिंग
के आधार पर पुरुष को शश (खरगोश), बैल और घोड़े की संज्ञा दी गई है। स्त्री
की योनि कम गहरी, ज्यादा गहरी या साधारण गहरी होने के आधार पर उसे मृगी
(हिरनी), घोड़ी तथा हथिनी की संज्ञा दी जाती है...............................
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वात्स्यायनः के मुताबिक बाभ्रवीय
आचार्यों का संभोग कला के 64 भेदों के बारे में दिया गया मत गलत है क्योंकि
इनमें से सबसे 8-8 भेद नहीं होते बल्कि किसी के कम होते हैं तो किसी के
ज्यादा होते हैं। इसके अलावा इन आठों से अलग प्रहणन, विरुत पुरुषोपसृत,
चित्ररत आदि..............................
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नखक्षत (नाखूनों को गढ़ाना), दन्तक्षत
(दांतों से काटना), चुम्बन आदि का प्रयोग अक्सर संभोग क्रिया करने से
सहभागी की काम-उत्तेजना को जागृत करने से पहले किया जाता है। यह तीनों
एक-दूसरे से पीछे नहीं होते हैं क्योंकि संभोग क्रिया से पहले किसी चीज के
लिए नियम नहीं होता................................
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अपने अंदर की काम-उत्तेजना को
स्त्री को दिखाने के लिए मन्दवेगी (संभोग क्रिया में पूरी तरह से जो पुरुष
संपन्न नहीं होता) पुरुष कहीं दूसरे देश आदि से वापस आने के बाद, सुहागरात
के दिन, स्त्री के गुस्से में आने के बाद, काम से खाली होने के बाद या खुश
होने के बाद नाखूनों से सहलाते और खुजलाते हैं...............................
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दांत ऊंचे-नीचे न होकर बिल्कुल
समान होने चाहिए। दांतों में चमक होनी चाहिए, पान आदि खाने से दांत लाल
नहीं होने चाहिए। दांत न तो बहुत ज्यादा बड़े होने चाहिए और न ही ज्यादा
छोटे होने चाहिए। दांतों के बीच में छेद नहीं होना चाहिए। दांत एक-दूसरे से
बिल्कुल सटे होने चाहिए और तेज होने चाहिए।...............................
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मृगी स्त्री अगर अपने शिरोभाग को
नीचा करके कटि वाले भाग को ऊंचा कर लेती है तो इससे उसका योनिद्वार चौड़ा
हो जाता है। इसे उत्फुल्लक कहते हैं। इसके लिए स्त्री को अपनी कमर के नीचे
तकिया रख लेना चाहिए।...............................
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संभोग क्रिया के समय एक-दूसरे पर
प्रहार करना भी संभोग का ही एक अंग माना जाता है। इस प्रहार के लिए दोनों
कंधे, दोनों स्तनों के बीच का भाग, पीठ, जांघे, सिर और दोनों बगलें उपयुक्त
रहती हैं।..............................
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संभोग क्रिया में जिस समय स्त्री,
पुरुष की तरह का व्यवहार करती है तो उसे विपरीत रति कहते हैं। स्त्री के
साथ काफी देर से संभोग करते हुए जब पुरुष थक जाता है, लेकिन स्त्री की तब
तक भी काम-इच्छा शांत नहीं हुई होती तो ऐसे में स्त्री, पुरुष की मर्जी से
उसके ऊपर लेटकर संभोग क्रिया करती है।..............................
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अगर पुरुष दुबारा से किन्नर को यह
क्रिया करने के लिए कहता है तो उसे पुरुष के लिंग को मुंह के अंदर लेकर
दोनों होठों से दबाकर खींचते हुए उसे चूमना चाहिए। इस क्रिया को बहिःसंदंश
कहते हैं।...............................
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नागरक को अपने नौकरों तथा दोस्तों
द्वारा फूलों से सजाए गए सुगंधित संभोग क्रिया करने वाले कमरे में अपनी
खूबसूरत, महंगे वस्त्रों में सजी, गहनों से लदी हुई, शराब का सेवन की हुई
स्त्री के पास जाकर बैठे तथा उससे दुबारा उससे शराब पीने के लिए कहें।...............................
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