कफ विकार :
कफ (बलगम) : कफ (बलगम) हमारे गले व फेफड़ों में
जमने वाली एक श्लेष्मा होती है जो खांसी या खांसने के साथ बाहर आता है। यह
फायदेमंद और नुकसानदायक दोनों है। हमारे दैनिक सांस लेने क्रिया के समय जो
गन्दगी हमारे शरीर में जाती है .....................>> Read More
कफ-पित्त ज्वर : चिकने, भारी, मीठे, खट्टे, नमकीन और शीतल पदार्थों के गलत आहार, दिन में सोना और परिश्रम न करना आदि कारणों से कफ कुपित होकर आमाशय में जाकर रस को दूषित करता है तथा पेट की गर्मी को बाहर कर बुखार को जन्म देता है.....................>> Read More
कफ-पित्त ज्वर : चिकने, भारी, मीठे, खट्टे, नमकीन और शीतल पदार्थों के गलत आहार, दिन में सोना और परिश्रम न करना आदि कारणों से कफ कुपित होकर आमाशय में जाकर रस को दूषित करता है तथा पेट की गर्मी को बाहर कर बुखार को जन्म देता है.....................>> Read More
पित्त विकार :
पित्त ज्वर : नमकीन,
खट्टे, गरम, तीखे और गरिष्ठ पदार्थों को ज्यादा खाने से या ज्यादा खाना,
ज्यादा मेहनत, तेज धूप या आग के सामने बैठना और ज्यादा क्रोध यानी गुस्सा
करने से भी इसका बुखार हो सकता है.......................>> Read More
पित्त की वृद्धि : पित्त की वृद्धि से कब्ज, सिर दर्द, भूख न लगना, सुस्ती आदि के लक्षण होते हैं। इससे शरीर के अन्दर और बाहर दोनों जगह जलन होती है.......................>> Read More
शीतपित्त : खून की गर्मी या पित्त के ज्यादा होने से कभी-कभी त्वचा पर लाल-लाल चकत्ते या ददोड़े से निकल आते है जिनमें खुजली होती है। इसे पित्ती उछलना कहते है.......................>> Read More
पित्त की पथरी : पित्ताशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता हैं) में कोई पदार्थ जब जमकर पथरी का रूप धारण कर लेती है तो उसे ही पित्त की पथरी कहते हैं.......................>> Read More
पित्त की वृद्धि : पित्त की वृद्धि से कब्ज, सिर दर्द, भूख न लगना, सुस्ती आदि के लक्षण होते हैं। इससे शरीर के अन्दर और बाहर दोनों जगह जलन होती है.......................>> Read More
शीतपित्त : खून की गर्मी या पित्त के ज्यादा होने से कभी-कभी त्वचा पर लाल-लाल चकत्ते या ददोड़े से निकल आते है जिनमें खुजली होती है। इसे पित्ती उछलना कहते है.......................>> Read More
पित्त की पथरी : पित्ताशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता हैं) में कोई पदार्थ जब जमकर पथरी का रूप धारण कर लेती है तो उसे ही पित्त की पथरी कहते हैं.......................>> Read More
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